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आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल के त्यागपत्र के बाद तेज़ हुई राजनीति

आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कार्यकाल पूरा होने से नौ महीने पहले त्यागपत्र दे दिया है। उर्जित पटेल ने इस्तीफे में कहा है, “व्यक्तिगत कारणों की वजह से मैंने मौजूदा पद तत्काल प्रभाव से छोड़ने का फैसला किया है। वर्षों तक रिजर्व बैंक में विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ मुझे रिजर्व बैंक में सेवा का मौका मिला, यह मेरे लिए सम्मान की बात है।” ध्यान देने योग्य बात यह है कि उर्जित पटेल का कार्यकाल सितंबर 2019 में खत्म होने वाला था। पटेल नोटबंदी से दो महीने पूर्व सितंबर 2016 में रिज़र्व बैंक के 24वें गवर्नर नियुक्त किए गए थे। 26 साल में आरबीआई गवर्नर के तौर पर उर्जित का कार्यकाल सबसे छोटा रहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पटेल के बेहतर भविष्य की कामना की है। नवभारत टाइम्स  में प्रकाशित समाचार के अनुसार रिज़र्व बैंक की स्वायत्तता पर केंद्र सरकार के कथित हस्तक्षेप को लेकर पिछले कई दिनों से बहस चल रही थी। यह उर्जित पटेल के त्यागपत्र का कारण हो सकता है।

आपको बता दें कि आरबीआई गवर्नर ने ऐसे समय में त्यागपत्र दिया है जब एक दिन बाद ही संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है। हमलावर विपक्ष अब आरबीआई के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है, “मैं उम्मीद करता हूँ कि उर्जित पटेल का त्यागपत्र प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश की अर्थव्यवस्था की संस्थागत नींव को नष्ट करने के प्रयासों की वजह से ना आया हो।”