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सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में अयोध्या से लंबी चली थी केशवानंद मामले की सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की सबसे शक्तिशाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने शनिवार को अयोध्या में राजनीतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील दशकों पुराने मंदिर-मस्जिद भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की सुनवाई 40 दिनों तक चली। यह सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में दूसरी सबसे लंबी कार्यवाही थी। इस मामले की कानूनी कार्यवाही को पाँच जजों की बेंच ने छह अगस्त से 16 अक्टूबर तक चली रोजाना सुनवाई में पूरा किया। इसका अहम और ऐतिहासिक निर्णय शनिवार (9 नवंबर) को आया।

बता दें कि 1973 का केशवानंद भारती मामला सर्वोच्च न्यायालय के इतिहास में चली सबसे लंबी कार्यवाहियों में से एक है। इस मामले ने संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था। इसकी सुनवाई न्यायालय ने 68 दिनों में पूरी की गई थी। देश में संविधान के मूल मंत्र “देर सही पर अन्याय नहीं” से आम लोगों को अवगत कराया था।

पूर्व न्यायाधीश रंजन गोगोई एवं देश के अगले न्यायधीश एसए बोबडे समेत अन्य न्यायधीशों ने राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के बीच के सदियों पुराने विवाद को जड़ से खत्म कर दिया है।