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नक्सलियों की कैद से छूटे राकेश्वर मन्हास बोले, “माँ की दुआओं ने दिया नया जीवन”

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में 3 अप्रैल को नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया था, जिसमें 22 जवान शहीद हो गए थे और सीआरपीएफ कमांडो राकेश्वर मन्हास को बंधक बना लिया गया था। 5 दिन तक नक्सलियों के कब्जे में रहने के बाद 8 अप्रैल को वह उनके चंगुल से मुक्त हुए और शुक्रवार (16 अप्रैल) को अपने घर लौट आए।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, राकेश्वर मन्हास ने बताया, “5 दिन तक खुद को जिंदा रखने के लिए मेरे पास धैर्य के सिवा कुछ नहीं था। मुझे मेरी माँ की प्रार्थन ने ही जीवित रखा है। बिल्कुल भरोसा नहीं था कि नक्सली मुझे छोड़ देंगे क्योंकि उनके चंगुल से अब तक कोई बचकर नहीं आया है।”

उन्होंने कहा, “मैं अपने दूसरे जीवन का श्रेय माँ को देना चाहता हूँ। उनकी दुआओं ने ही मुझे नया जीवन दिया है।” 8 अप्रैल को मुक्त किए जाने के बाद शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थित बरनी गाँव में पहुँचने पर राकेश्वर मन्हास के परिवार वालों और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया।

सीआरपीएफ कमांडो की पत्नी मुन्नी ने कहा, “उनके जीवन का बुरा दौर गुज़र गया है। उनको उम्मीद है कि वह जल्द अपने काम पर फिर से लौटेंगे।” राकेश्वर मन्हास की माँ ने कहा, “मैंने अपने बेटे की मुक्ति के लिए माता वैष्णो देवी से प्रार्थना की थी। उन्होंने मेरी बात सुन ली और मेरा बेटा सुरक्षित वापस लौट आया।”