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“संसद हमले का दिन कमाल का था”, वीडियो में खुद को गिद्ध बताया राजदीप सरदेसाई ने

वायरल हुए एक वीडियो में राजदीप सरदेसाई अपनी प्रवृत्ति को जग जाहिर करते नज़र आ रहे हैं। उन्होंने खुद की तुलना गिद्धों से भी की।

पत्रकारिता जीवन के अपने किस्से सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब 2001 में संसद हमले हुए थे तो वे संसद पर उपस्थित थे। शुक्रवार को कोई विशेष कार्यवाही न होने के कारण वे अपने साथियों के साथ संसद के निकट बगूचे में बैठ कर शराब और कबाब से पार्टी करने की योजना बना रहे थे।

जब उन्हें बंदूकों की आवाज़ सुनाई दी तो उनके कैमरामन ने वहाँ से निकलने के लिए कहा, इस पर सबसे पहले उन्होंने कहा कि संसद का द्वार बंद करो जिससे कोई और चैनल भीतर न आ पाए जिससे केवल उन्हें ही ये स्टोरी मिले। इसके साथ ही उन्होंने कहा, “मज़ा करो” और संसद हमले के दिन को कमाल का दिन कहा।

2002 के गुजरात दंगों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे “सही समय पर सही जगह पर उपस्थित थे”। अवसरवादिता को पत्रकारिता में उन्होंने सर्वोपरि माना।

यह वीडियो यहाँ देखा जा सकता है-