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सीएए के समर्थन को इस्लाम की अवमानना बता क़तर में भारतीय डॉक्टर का निष्कासन

हमारे देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर चल रहे विरोध प्रदर्शन की लहर गल्फ देशों तक भी पहुँच गई है। जनम टीवी  ने रिपोर्ट किया कि क़तर में कार्यरत एक चिकित्सक को फ़ेसबुक पोस्ट में सीएए का समर्थन करना भारी पड़ा। कुछ स्वार्थों की पूर्ति हेतु उनके विरुद्ध झूठ फैलाकर उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर किया गया।

अजीत मलियादान नांमक ये चिकित्सक क़तर के नज़ीम हेल्थ केयर में काम करते हैं। कुछ सांप्रदायिक समूहों द्वारा उनके फ़ेसबुक पोस्ट पर उनपर धर्म की अवमानना का आरोप लगाया गया।

हालाँकि, रिपोर्ट का दावा है कि यह पोस्टि किसी धर्म के विरोध में नहीं था। पोस्ट में उन्होंने मात्र सीएए विरोधी प्रदर्शनों का उद्देश्य मोदी सरकार को गिराना बताया था और कहा था कि धार्मिक भावनाओं को भड़काकर हिंसा फैलाई जा रही है।

सांप्रदायिक समूहों ने झूठ फैलाया कि डॉक्टर मलियादान इस्लाम को नीचा दिखा रहे हैं और उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत कर रहे हैं जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने उके त्याग-पत्र की मांग की।

रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टर मलियादान को केरल लौटने पर भी सांप्रदायिक समूहों से खतरा रहेगा। इसके अलावा भी कुछ रिपोर्टों में सामने आया है कि केरल के कट्टरवादी मुस्लिम प्रवासी जिहादी स्लीपर सेलों के साथ इस्लामी देशों में रह रहे सीएए का समर्थन करने वाले हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।

कथित रूप से उन्होंने वॉट्सैप व अन्य सोशल मीडिया समूह बनाए हैं जहाँ सीएए का समर्थन करने वाले लोगों को रिपोर्ट किया जाता है और उन्हें अरब देशों की नौकरी से निकलवाने का षड्यंत्र रचा जाता है।