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कांग्रेस के रवनीत बिट्टू की टिप्पणी पर दलित आक्रोशित, पुतला फूँका व त्याग-पत्र मांगा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में पार्टी के कार्यवाहक नेता रवनीत बिट्टू को अपनी हालिया टिप्पणी को लेकर पंजाब में दलित समूहों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, बसपा को आनंदपुर साहिब और चमकौर साहिब जैसी ‘पवित्र’ सीटें देने पर उन्होंने शिरोमणि अकाली दल की आलोचना की थी।

रवनीत बिट्टू ने सोमवार शाम अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो पोस्ट किया था। उसमें उन्होंने शिरोमणि अकाली दल और बसपा के नए गठबंधन पर टिप्पणी की थी। बसपा नेताओं ने टिप्पणी को जातिवादी बताया और पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया। बसपा कार्यकर्ताओं ने बिट्टू का पुतला फूँका और उनके त्याग-पत्र की मांग की।

द ट्रिब्यून ने बसपा के एक कार्यकर्ता के हवाले से कहा, “एक बसपा नेता पवित्र सीट से कैसे और क्यों नहीं लड़ सकता है? क्या सांसद अब भी दलितों या बसपा नेताओं को अपवित्र मानते हैं? या हो सकता है कि वह बाकी राज्य को कम पवित्र मानते हैं।”

इस पर रवनीत बिट्टू ने कहा, “मेरे बयान का गलत मतलब निकाला गया। मेरे कहने का मतलब केवल यह था कि अकाली दल ने पंथिक सीटें छोड़ दी थीं। मैंने दलितों के खिलाफ कभी कोई टिप्पणी नहीं की। बसपा का मतलब दलित नहीं है क्योंकि पार्टी में सभी जातियों के कार्यकर्ता हैं। मेरे राजनीतिक गुरु मलकीत सिंह दाखा एक दलित हैं।”

बता दें कि राहुल गांधी के करीबी सहयोगी रवनीत बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं।