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नीति आयोग ने एसबीआई संग एकीकरण में शामिल पाँच बैंको को निजीकरण से बाहर रखा

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) जो भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ गत एकीकरण दौर में शामिल थे, उन्हें नीति आयोग ने निजीकरण योजनाओं से बाहर रखा है।

पाँच संबंधित पीएसबी में पंजाब नैशनल बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया हैं।

केंद्रीय बजट 2021 में जिस तरह घोषित किया गया कि केंद्र सरकार आगामी वित्तीय वर्ष में एक सामान्य बीमाकर्ता के साथ दो बैंकों के निजीकरण के संबंध में निर्णय लेने को तैयार है।

अगस्त 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार ने 10 पीएसबी को चार में विलय कर दिया था। इस तरह पीएसबी की संख्या 27 से घटाकर 12 कर दी गई है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जिस तरह ये बैंक अब भी एकीकरण प्रक्रिया में हैं, ऐसे में उनका निजीकरण उन्हीं के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय भी इन बैंकों के तेजी से एकीकरण को सुनिश्चित करने के लिए उत्सुक है। मंत्रालय ने कथित तौर पर वर्तमान विभाजन लक्ष्य में उन्हें शामिल नहीं करने के लिए नीति आयोग के दृष्टिकोण को साझा किया है।

एक बार अंतिम रूप देने के बाद निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) संबंधित प्रस्ताव को मंत्रियों के एक समूह के पास ले जाएगा।

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष-22 के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा था और बैंकिंग एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र है, जिसे इस प्रक्रिया के हिस्से के रूप में केंद्रित किया जाएगा।