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“किसान आंदोलन से दिसंबर तिमाही में ₹70,000 करोड़ का नुकसान”- पीएचडीसीसीआई

एक प्रमुख आकलन में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने कहा, “तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शनों की वजह से दिसंबर तिमाही में 70,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा।”

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने कहा, “आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के कारण बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान और दिन-प्रतिदिन की आर्थिक गतिविधियों विशेषकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यवधान के कारण हुई है।”

उन्होंने यह भी कहा, “खाद्य प्रसंस्करण, सूती वस्त्र, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, कृषि मशीनरी, सूचना प्रौद्योगिकी, व्यापार, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और परिवहन जैसे क्षेत्रों को आंदोलन ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसकी वजह से उद्योगों को कई कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हुई है।”

यह आकलन ऐसे समय में हुआ है, जब केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत अनिर्णायक रही है। नवीनतम दौर की बातचीत में सरकार ने प्रदर्शनकारियों की चार मांगों में से दो पर सहमति व्यक्त की थी। इसमें स्टबल बर्निंग पर दंड को हटाने और विद्युत संशोधन विधेयक 2020 शामिल हैं।