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किसान यूनियनों ने सर्वोच्च न्यायालय के एक समिति बनाने के सुझाव को खारिज किया

विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान यूनियनों ने सर्वोच्च न्यायालय के तीन कृषि सुधार कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने के विचार का स्वागत किया लेकिन उन्होंने जारी गतिरोधों को हल करने के लिए एक समिति नियुक्त करने के सुझाव को खारिज कर दिया है।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सोमवार (11 जनवरी) देर रात जारी बयान में कहा, “सभी संगठन कृषि कानूनों के कार्यान्वयन को स्थगित रखने के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सुझावों का स्वागत करते हैं। फिर भी हम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति के समक्ष किसी भी कार्यवाही में भाग लेने के लिए सामूहिक और व्यक्तिगत रूप से तैयार नहीं हैं।”

क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा, “एक समिति सिर्फ देरी की रणनीति है, जो सरकार चाहती है। विरोध प्रदर्शन सरकार के खिलाफ है इसलिए सरकार को लोगों के गुस्से का सामना करना चाहिए और कानूनों को निरस्त करना चाहिए।”

कुछ किसान नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समिति के गठन के सुझाव को हनी ट्रैप के रूप में संदर्भित करते हुए बाध्यकारी मध्यस्थता बताई है, जिसके बाद वे विरोध स्थल को खाली कर सकते हैं। सुझाई गई समिति को बनाने में स्पष्टता की कमी को लेकर पंजाब से विरोध करने आए किसान संघ भी सतर्क हैं।

सर्वोच्च न्यायालय मंगलवार (12 जनवरी) को किसानों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक याचिका पर अपना आदेश देने वाली है।