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‘सूरजमुखी अंधेरे में’- प्रखर हिंदी लेखिका कृष्णा सोबती का 93 वर्ष की आयु में निधन

प्रखर हिंदी लेखिका कृष्णा सोबती का शुक्रवार (25 जनवरी) को 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अपनी आखिरी साँस दिल्ली के अस्पताल में ली जहाँ वे पिछले दो महीनों से भर्ती थीं, ट्रिब्युन इंडिया  ने बताया।

“वे फरवरी में अपने 94 वर्ष पूरी करने वाली थीं तो अवश्य ही आयु एक कारण है। पिछले एक सप्ताह से वे आईसीयू में थीं। बीमार होने के बावजूद उनका उनके विचारों पर नियंत्रण था और समाज में हो रही गतिविधि के प्रति वे जागरुक थीं।”, उनके नित्र व राजकमल प्रकाशन के प्रबंधक निदेशक अशोक माहेश्वरी ने बताया।

18 फरवरी 1925 को गुज्रात (अब पाकिस्तान में) में जन्मीं सोबती महिला अस्तित्व और पहचान पर लिखने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हशमत नाम से हम हशमत  में भी लिखा था। 1980 में उन्हें उपन्यास ज़िंदगीनामा  के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार और 2017 में भारतीय साहित्य में योगदान के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सूरजमुखी अंधेरे के, यारों के यार और डार से बुछुड़ी उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।