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निर्यात केंद्र के रूप में काशी को विकसित करने का प्रधानमंत्री मोदी का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (9 जुलाई) को काशी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लॉकडाउन के दौरान बेहतर कार्य करने वाले अन्न सेवियों से संवाद किया और उनके कार्यों की सराहना की। साथ ही उन्होंने बनारस को भारत के बड़े निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की भी बात कही।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री ने संबोधन की शुरुआत हर-हर महादेव के उद्घोष से की। उन्होंने कहा, “ये भगवान शंकर का आशीर्वाद है कि कोरोना काल में भी काशी उम्मीद से भरी है। ये सही है कि लोग बाबा विश्वनाथ धाम नहीं जा पा रहे, मानस मंदिर, दुर्गाकुंड, संकटमोचन में सावन का मेला नहीं लग पा रहा। यह भी सही है कि संकट के समय में हमारी काशी ने उसका डटकर सामना किया है।”

उन्होंने कहा, “माँ अन्नपूर्णा और बाबा विश्वनाथ सबके खाने का इंतज़ाम कर देंगे। सभी के लिए, तमाम संगठनों के लिए यह सौभाग्य की बात है कि इस बार गरीबों की सेवा का माध्यम भगवान ने हमें बनाया। एक तरह से आप सभी माँ अन्नपूर्णा और बाबा विश्वनाथ के दूत बनकर हर ज़रूरतमंद तक पहुँचे।”

उन्होंने बनारस के विकास कार्योंं को लेकर विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों से विचार-विमर्श किया और बाबा विश्‍वनाथ कॉरिडोर को लेकर भी जानकारियाँ हासिल कीं। “लगभग 8,000 करोड़ की परियोजना पर अलग-अलग काम चल रहा है। स्थितियाँ सामान्‍य होते ही काशी की रौनक लौट आएगी। गंगा आरती के लिए ऑडियो वीडियो स्‍क्रीन लगाने का काम और दशाश्‍वमेध घाट का सुंदरीकरण जल्‍द होगा।”, उन्होंने कहा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हम काशी को नए केंद्र के रूप में देखना चाहते हैं। इसे भारत के बड़े निर्यात केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार के हाल के फैसलों के बाद बनारस की साड़ियाँ, दूसरे हस्तशिल्प, डेयरी, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन के व्यवसाय के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।”