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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने को कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से सत्ता में वापसी के बाद रविवार को पहली बार मन की बात कही। इस दौरान उन्होंने पानी बचाने के लिए स्वच्छता की तरह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की देशवासियों से अपील की।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “वर्षभर पानी की कमी से देश के कई हिस्से प्रभावित रहते हैं। बारिश के जरिए मिलने वाली पानी में से सिर्फ आठ प्रतिशत को ही हम संरक्षित कर पा रहे हैं। हम जनशक्ति से जल संकट का उपाय निकालने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “देश में नया जलशक्ति मंत्रालय बनाया गया है। मैंने पानी के संचय के लिए ग्राम प्रधानों को खुद पत्र लिखा है। मेरी देशवासियों से अपील है कि जल संरक्षण को आंदोलन बना दें और पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए मेहनत करें।”

“मेरी एक और अपील है कि जल संरक्षण के लिए काम करने वाले लोगों से जो जानकारी मिले, उसे ‘हैशटैग जनशक्ति जलशक्ति’ के साथ साझा करें। इससे एक डाटाबेस तैयार किया जा सकेगा, जिससे यह मालूम चल सकेगा कि देशवासियों ने जल संरक्षण के लिए कितने प्रयास किए हैं।”

केदारनाथ चले जाने के सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा, “चुनाव की आपाधापी में मैं केदारनाथ चला गया था। कई ने इसके राजनीतिक अर्थ निकाले। दरअसल, यह यात्रा खुद से मिलने की थी। मन की बात के कारण जो खालीपन था, उसे केदारनाथ की खाली गुफा ने भरने का मौका दिया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कार्यकाल के दौरान 53 बार मन की बात की थी। फरवरी में आखिरी बार उन्होंने मन की बात में लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करने की उम्मीद जताई थी।