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मोदी मंत्री परिषद में फेरबदल आगामी राज्यों के चुनावों के लिए क्या मायने रखता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्री परिषद में बुधवार (7 जुलाई) को हुए बड़े फेबरदल में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ और कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा जैसे क्षेत्रीय नेताओं के पूर्ण समर्थन के संकेत दिए गए। उन्होंने भले कई चुनौतियों का सामना किया हो पर भाजपा के आला अधिकारियों का समर्थन पाने में वे सफल रहे।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी मंत्री परिषद के फेरबदल में उप्र के 15 नेता सम्मिलित थे, जिनका आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए समावेश हुआ। यह भाजपा के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है और इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से पूर्व परिणाम के रूप में देखा जाएगा।

हालाँकि, कुर्मियों का भी यथावत प्रतिनिधित्व किया गया। ऐसे में योगी मंत्रालय में भी परिवर्तन की उम्मीद है और कुछ क्षेत्रीय दलों जैसे निषाद संगठन और राजभर समुदाय के नेताओं को भी जगह मिलने की संभावना है। संतोष गंगवार का निष्कासन संकेत है कि राज्य के नेताओं को मुख्यमंत्री के पीछे रैली करने और उन्हें नेता के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता होगी।

कर्नाटक में शोभा करंदलाजे का प्रभुत्व में आना और सदानंद गौड़ा का जाना स्पष्ट संदेश है कि पार्टी येदियुरप्पा को बदलने के विचार में नहीं। एक प्रभावी नेता के रूप में देखी जाने वाली शोभा का चयन येदियुरप्पा को अस्थिर करने के अभियान के लिए झटका है। पार्टी आलाकमान ने इस पर गौर नहीं किया और राज्य सरकार के प्रदर्शन को संतोषजनक बताया।

महाराष्ट्र और गुजरात में भी भाजपा के आला नेता लंबी अवधि की योजना के साथ सावधानी से चल रहे हैं। कैबिनेट मंत्री के रूप में नारायण राणे की उपस्थिति शिवसेना के लिए कड़ा संदेश है कि भाजपा भविष्य में अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयार में है। कोंकण के दिग्गज राणे का शिवसेना के साथ सीधा टकराव रहा, जिनकी क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति है।