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केपी शर्मा ओली की कुर्सी पर खतरा, नेपाल स्थित चीनी राजदूत से बैठक पर उठे प्रश्न

नेपाल में सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के भीतर सियासी घमासान तेज़ हो गया है। पार्टी के अधिकतर नेता प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के त्याग-पत्र की बात कर रहे हैं। बुधवार (18 नवंबर) को हुई बैठक में ओली से कहा गया कि वह विरोधी नेताओं की मांगों पर 10 दिन में जवाब दें।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, केपी शर्मा ओली बैठक में शामिल नहीं होना चाहते थे पर वरिष्ठ नेता कमल दहल उर्फ प्रचंड के दबाव के आगे वह मजबूर हो गए। कुछ नेताओं ने एनसीपी की बैठक के पूर्व चीन की राजदूत होउ यांकी से दो घंटे की मुलाकात पर भी सवाल उठाए हैं।

बालुवातार स्थित आधिकारिक निवास पर जैसे ही बैठक शुरू हुई ओली ने पार्टी के केंद्रीय सचिवालय के सदस्यों से कहा कि वह अगली बैठक में अलग राजनीतिक दस्तावेश पेश करेंगे। इसे तैयार करने के लिए 10 दिनों का समय दिया जाए। सीपीएन के प्रवक्ता नारायणकाजी श्रेष्ठ ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पार्टी की अगली बैठक 28 नवंबर को होगी।

बैठक में प्रचंड द्वारा दिए गए 19 पन्नों की राजनीतिक रिपोर्ट पर चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों की मानें तो प्रचंड ने ओली पर पार्टी से विचार-विमर्श किए बिना और नियमों के विपरीत सरकार चलाने का आरोप लगाया था।

भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के प्रमुख सामंत कुमार गोयल के साथ प्रधानमंत्री की हालिया भेंट के संबंध में पार्टी सचिवालय को अवगत नहीं कराने का भी मामला उठाया गया है। बता दें कि ओली ने प्रचंड से रिपोर्ट वापस लेने का अनुरोध करते हुए कहा था कि यह उनके लिए स्वीकार्य नहीं है।

सूत्रों की मानें तो 21 अक्टूबर को गोयल और ओली की भेंट के बाद पार्टी में उभरे विवाद समेत कई मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच कई दिनों से गतिरोध बढ़ता जा रहा है।