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ऊर्जा क्षेत्र में पथप्रदर्शक परिवर्तन- गोयल को मिला अंतर्राष्ट्रीय कार्नोट सम्मान

पीयूष गोयल को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में पथप्रदर्शक परिवर्तन करने के लिए कार्नोट पुरस्कार से सम्मानित किया गया और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सौर एलायंस को पुरस्कार राशि दान कर दी

केंद्रीय वित्त और रेल मंत्री पीयूष गोयल को चिरस्थायी ऊर्जा समाधान में उनके काम के लिए पेन्सिलवानिया विश्वविद्यालय के क्लेनमैन सेंटर द्वारा चौथे कार्नोट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

कार्नोट पुरस्कार क्लेमन सेंटर द्वारा दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कार है, जो उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने ऊर्जा नीति में कोई विशिष्ट योगदान दिया हो। इसे ऊर्जा क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक माना जाता है। पिछले पुरस्कार विजेताओं में आईएचएस के उपाध्यक्ष डॉ डैनियल येरगिन, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के निदेशक डॉ फातिह बिरोल, ऊर्जा एवं पर्यावरण के क्षेत्र में एक लोक सेवक जीना मैकार्थी शामिल हैं।

पुरस्कार का नाम फ्रांसीसी वैज्ञानिक सादी कार्नोट की याद में रखा गया है, जिन्होंने 1824 में मोटिव पॉवर ऑफ फायर पर एक मीमांसा प्रकाशित किया था, जो बाद में ऊष्मप्रवैगिकी के दूसरे नियम का आधार बन गया। कार्नोट पुरस्कार का उद्देश्य उन लोगों को सम्मानित करना है जिन्होंने ऊर्जा नीति के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।

एक अनुलेखन में संस्थान ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र में पथप्रदर्शक परिवर्तन की शुरुआत करने के लिए गोयल की सराहना करते हुए कहा

गोयल के कार्यकाल के दौरान भारत ने अपने बिजली क्षेत्र में परिवर्तनकारी बदलाव देखे हैं जिसमें देश के कुछ सबसे दूरदराज और दुर्गम भागों में स्थित लगभग 18,000 गांवों को  फास्ट ट्रैक विद्युतीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। गोयल की अन्य परियोजनाओं में एक व्यापक बिजली क्षेत्र सुधार योजना, दुनिया का सबसे बड़ा एलईडी बल्ब वितरण कार्यक्रम और दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार कार्यक्रम शामिल है। “

2016 के कार्नोट पुरस्कार विजेता एवं अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फतिह बिरोल कहते हैं– “गोयल की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियाँ उल्लेखनीय हैं। गोयल ने भारत के व्यापक बिजली क्षेत्र में सुधार किया, दुनिया के सबसे बड़े और सबसे सफल एलईडी प्रकाश व्यवस्था कार्यक्रम का निरीक्षण किया और अक्षय ऊर्जा स्रोतों का विस्तार किया। उन्होंने लाखों भारतीयों को बिजली पहुँचाने में भी मदद की।

आईईए के रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2000 में, भारत की आधी से कम आबादी के पास बिजली पहुँच रही थी। मगर अब 80 प्रतिशत से अधिक आबादी के पास बिजली पहुँच रही है। अगर इसी गति से कार्य चलता रहा तो भारत में 2020 तक सार्वभौमिक विद्युतीकरण होगा और बिरोल के हिसाब से यह विद्युतीकरण के इतिहास में सबसे बड़ी सफलता होगी।

क्लिनमैन सेंटर के संकाय निदेशक मार्क एलन ह्यूजेस ने कहा कि गोयल के प्रयासों से यह प्रमाणित होता है कि जटिलता के बीच ऊर्जा परिवर्तन करने के लिए क्याक्या करना पड़ता है। विश्व के गरीबों तक बिजली पहुँचाना और उनका जीवन रोशन करना उनको शक्ति प्रदान करता है और शिक्षा, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों को भी सशक्त बनाता है।

गोयल 2018 में कार्नोट पुरस्कार प्राप्त करने के लिए अक्टूबर में फिलाडेल्फिया गए थे। हालाँकि उन्हें अमृतसर ट्रेन त्रासदी के कारण इस कार्यक्रम को छोड़ना पड़ा। बुधवार (30 जनवरी) को दिल्ली में आयोजित एक पुरस्कार समारोह में, गोयल को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक डॉ फेथ बिरोल द्वारा पुरस्कार प्रदान किया गया।

कार्नोट पुरस्कार अर्जित करने के बाद गोयल ने कहा-” मैं यह पुरस्कार उनको समर्पित करना चाहता हूँ जो लोग ऊर्जा एवं खनन क्षेत्र में कार्यरत हैं तथा मोदी जी का इस बात के लिए धन्यवाद करना चाहता हूँ कि उन्होंने भारत को ऊर्जाअभाव राष्ट्र से एक बिजलीअधिशेष राष्ट्र में परिवर्तित कर दिया।“

गोयल ने कहा- “यह मेरे लिए और उन सभी लोगों के लिए गर्व की बात है, जो इस कार्य का पूरा करने हेतु प्रयासरत हैं कि हमारे प्रयासों को पेन्सिलवानिया विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता दी गई।“

गोयल ने कहा कि वह लगभग 18 लाख रुपये के पुरस्कार राशि का दान अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) को करेंगे ताकि इस राशि से उन संगठनों कि मदद की जा सके जो अपाहिज बच्चों के लिए काम करते हैं और जो सौर ऊर्जा का विस्तार करने हेतु प्रयासरत हैं।

गोयल ने कहा- “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन का समर्थन करने के लिए, हमने देश भर में रेलवे के बड़े ट्रैकों में सौर स्थापनाओं की संकल्पना की है, जिससे उत्सर्जन कम होने के साथ-साथ राजस्व भी बढ़ेगा।”

गोयल ने कहा कि भारतीय रेलवे ने दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी विद्युतीकरण कार्यक्रम को शुरू किया है, जहाँ अगले चार या पाँच वर्षों में पूरे ग्रिड का विद्युतीकरण शत प्रतिशत होगा।