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आगरा की जामा मस्जिद में “दबी” कृष्ण जन्मस्थान मंदिर की मूर्तियों के परीक्षण की मांग

वाराणसी की जिला न्यायालय ने बीते दिनों भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण के लिए स्वीकृति दे दी। इसके अब कुछ दिनों बाद एक याचिका मथुरा न्यायालय में दायर की गई, जिसमें दावा किया गया कि श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर की मूर्तियाँ जहाँआरा मस्जिद के नीचे दबी हुई हैं, जिसे आगरा में जामा मस्जिद के नाम से जाना जाता है।

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के वकील शैलेंद्र सिंह द्वारा जनहित याचिका दायर की गई है, जो लखनऊ के पाँच याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने एएसआई से जहाँआरा मस्जिद में एक भू-विकिरण परीक्षण की मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या भगवान कृष्ण की मूर्तियाँ उसके नीचे दबी हुई हैं।

पीआईएल में जादूनाथ सरकार की लिखी औरंगजेब की कहानी एवं ऐतिहासिक निबंधों की किताब के पेज नंबर 11-12 का हवाला देते हुए पीआईएल में कहा गया, “बुंदेल राजा बिरसिंह देव द्वारा 33 लाख रुपये की लागत से बना केशव राय का मंदिर मथुर का सबसे भव्य मंदिर था, जिसे जनवरी 1670 में गिराकर वहाँ पर एक मस्जिद बनवाई गई थी। मूर्तियों को आगरा लाया गया और जहाँआरा की मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफनाया गया था।”

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर, जिसे कटरा केशव देव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, को पूरे इतिहास में कई बार नष्ट किया गया और औरंगज़ेब द्वारा 1670 में इसकी जगह एक मस्जिद बनवाई गई। 20वीं शताब्दी के अंत में उद्योगपतियों के एक समूह ने मथुरा में मूल मंदिर स्थल के बगल में वर्तमान मंदिर के निर्माण को प्रायोजित किया।