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नई जाँच- पीएफआई ने सीएए विरोधी दंगों हेतु 120 करोड़ रुपये खर्च किए थे

एक नई जाँच से पता चला है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) द्वारा सीएए के विरोध में दंगों को अंजाम देने के लिए 120 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए थे।

इंडिया टीवी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस ने कहा है कि राज्य में सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में पीएफआई सक्रिय रूप से शामिल था और कहा कि गिरफ्तार किए गए पीएफआई के 25 सदस्यों के खिलाफ उनके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

अब नई जाँच से दंगों के पीछे की पूरी कहानी के साथ-साथ योजनाबद्ध नेटवर्क का पता चला है जो इस तरह के विरोध प्रदर्शनों के लिए धन मुहैया करा रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम से 27 बैंक खाते खोले थे। नौ बैंक खाते रिहैब इंडिया फाउंडेशन के हैं, एक संगठन जो पीएफआई से जुड़ा है और इसी संगठन ने 17 अलग-अलग लोगों और संगठन के नाम पर 37 बैंक खाते खोले थे।

पुलिस ने इन 73 खातों की जाँच की और पीएफआई के खिलाफ पर्याप्त सबूत इकट्ठा किए। पुलिस के अनुसार जाँच से बचने के लिए इन 73 खातों में लगभग 120 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे। जमा किए जाने के बाद, खातों में केवल नाममात्र राशि के साथ खातों को खाली छोड़ दिया गया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जब से 4 दिसंबर को सीएए पास हुआ था तब से इन खातों में करोड़ों रुपयों की नकदी आने लगी थी। इसके अलावा, जमाकर्ताओं को एक समय में 50,000 रुपये से कम जमा करने का निर्देश दिया गया था। इन पैसों की उत्पत्ति का स्तोत्र अभी भी अज्ञात है।

इसके अतिरिक्त इन बैंक खातों में लेनदेन की तारीखें भी हिंसा की तारीखों से मेल खाती हैं जिससे हिंसक विरोध और पीएफआई के बीच एक स्पष्ट संबंध बनता है।

सीएए पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में छह उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करता है, जो कि मुस्लिम बहुल देश हैं। कानून बनने से पहले नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को संसद के दोनों सदनों के माध्यम से भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पारित कराया गया था।