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पायल तड़वी की आत्महत्या जाँच रिपोर्ट में रैगिंग की बात, जातीय टिप्पणी के साक्ष्य नहीं

मुंबई में मेडिकल की छात्रा डॉ. पायल तड़वी हत्याकांड की जाँच पूरी हो गई। महाराष्ट्र राज्य सरकार की ओर से गठित राज्यस्तरीय समिति की रिपोर्ट में तीन सीनियर छात्राओं द्वारा रैगिंग की बात सामने आई है। हालाँकि, रिपोर्ट में जातीय टिप्पणी किए जाने के सुबूत नहीं मिले हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 16 पन्ने की जाँच रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास है। इसे जल्द चिकित्सा शिक्षा विभाग मंत्री को सौंपा जाएगा। रिपोर्ट में तड़वी के परिवारवाले और आरोपी डॉ. भक्ति मेहर, डॉ. अंकिता खंडेलवाल और डॉ. हेमा आहूजा के माता-पिता के बयान शामिल हैं।

रिपोर्ट में पायल जहाँ पढ़ती थी, उस स्त्रीरोग और प्रसूति विभाग के प्रमुख की गलती का भी ज़िक्र है। उसमें कहा गया है कि वरिष्ठ डॉक्टरों की नज़रअंदाज़ी के कारण मुस्लिम छात्रा ने आत्महत्या की थी। फिर भी रिपोर्ट में विभाग प्रमुख या तीनों आरोपी छात्राओं के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का सुझाव नहीं दिया गया है।

तीनों आरोपी सीनियर छात्राएँ वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। महाराष्ट्र की अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत एडमिशन पाने वाली भील मुस्लिम समुदाय की पायल तड़वी ने 22 मई को टोपीवाला मेडिकल कॉलेज से जुड़े बीवाईएल अस्पताल के हॉस्टल में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसकी माँ ने पुलिस में तीनों सीनियर छात्राओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साईं ने कहा, “जाँच में कई कमियाँ हैं। कॉलेज के डीन पायल के शव को कमरे से हटाने और पुलिस की अनुपस्थिति में आपातकालीन विभाग में ले जाने के लिए अधिकृत नहीं हैं। कमरे को तुरंत सील नहीं किया गया था। जिस तरह से जाँच हुई है, उसमें पूर्णत: नियमों की अनदेखी की गई है।”