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पशुपति पासवान बगावत कर बने संसदीय दल के नेता, घर पहुँचे भतीजे चिराग से नहीं मिले

वर्ष 2000 में रामविलास पासवान द्वारा स्थापित की गई लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) उनके निधन के आठ महीने बाद कसौटी से गुज़र रही है जहाँ चिराग पासवान के चाचा पशुपति पासवान ने पाँच सांसदों को लेकर पार्टी पर अपना अधिकार जता दिया है।

उन्हें सर्वसम्मति से लोकसभा में संसदीय दल का नेता चुन लिया गया है। वहीं, छह सांसदों वाली पार्टी में अब चिराग पासवान अकेले पड़ गए हैं। वे चाचा से मिलने सोमवार (14 जून) को उनके आवास भी गए लेकिन भेंट नहीं हो सकी।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, बगावत के बाद चाचा पशुपति पासवान से मिलने पहुँचे चिराग को 25 मिनट तक गेट के बाहर प्रतीक्षा करनी पड़ी। बाद में द्वार खुला तो उन्होंने एक घंटे तक चाचा की प्रतीक्षा की लेकिन वे नहीं आए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से पाँचों बागी सांसदों ने आज दोपहर 3 बजे भेंट की और उन्हें समर्थन-पत्र सौंपा, जिसमें पार्टी ने अपना नया नेता पशुपति पासवान को चुनने की बात कही। अब पशुपति लोजपा के लोकसभा संसदीय दल के नेता होंगे।

महबूब अली कैसर लोकसभा संसदीय दल के उपनेता होंगे। सूरजभान सिंह भाई और नवादा से सांसद चंदन सिंह लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक होंगे। इससे पूर्व, पशुपति पारस ने प्रेसवार्ता करके कहा था, “भाई के जाने के बाद सभी को उम्मीद थी कि 2014 की तरह फिर से पार्टी एनडीए के साथ बनी रहेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ था।”

उनके अनुसार इससे पार्टी बिखर गई। “हमारे पाँच सासदों की इच्छा थी कि पार्टी को बचाया जाए। चिराग मेरा भतीजा है और मुझे उससे कोई परेशानी नहीं। चिराग अभी तक पार्टी के अध्यक्ष हैं लेकिन वे चाहे तो आगे भी पार्टी में रह सकते हैं। हमें उनसे कोई शिकायत नहीं।”, उन्होंने आगे कहा।