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नेपाल में प्रधानमंत्री ओली की सिफारिश पर संसद भंग, अप्रैल व मई में होंगे चुनाव

सत्ताधारी पार्टी में चल रहे सियासी घमासान के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रविवार ( 21 दिसंबर) को संसद भंग करने का निर्णय ले लिया। उनकी सिफारिश पर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने संसद भंग करने की अनुमति दे दी।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, संसद भंग होने के बाद अब अगले वर्ष अप्रैल-मई में देश में आम चुनाव करवाए जाएँगे। राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, 30 अप्रैल को पहले चरण के मतदान होंगे। दूसरे चरण का मतदान 10 मई को होगा।

राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, देश के संविधान के अनुच्छेद 76, खंड एक व सात और अनुच्छेद 85 के तहत संसद भंग करने का निर्णय लिया गया है।

सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) ने प्रधानमंत्री ओली के निर्णय का विरोध किया है। प्रवक्ता नारायणजी श्रेष्ठ ने इस कदम को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा, “संविधान के जानकार इस निर्णय को असंवैधानिक बता रहे हैं। उनका कहना है कि देश के संविधान में बहुमत प्राप्त सरकार के प्रधानमंत्री द्वारा संसद को भंग किए जाने के बारे में कोई प्रावधान ही नहीं है।”

इस घटनाक्रम के बाद प्रचंड के सात मंत्रियों ने अपना त्याग-पत्र दे दिया। उन्होंने साझा बयान में कहा, “पहले ही कह चुके थे कि हम प्रधानमंत्री के निर्णय के खिलाफ हैं। हमने विरोध के चलते पद त्यागा है।” दूसरे नेताओं ने प्रचंड के आवास पर बैठक कीं। इसमें निर्णय हुआ कि प्रचंड और दूसरे नेता इस मुद्दे पर बात करेंगे।