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नव निर्वाचित भाजपा पार्षदों नें कश्मीरी पंडितों के सुरक्षित आवास की माँग की

नगरीय प्रशासन के चुनावों में जीत दर्ज करने वाले भाजपा पार्षद, मुख्यत: कश्मीरी पंडितों के समक्ष अब कश्मीर घाटी में सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने की चुनौती है, द ट्रिब्यून  की रिपोर्ट में बताया गया।

भाजपा के कुल 106 निर्वाचित सदस्यों में से 30 कश्मीरी पंडित हैं, जिन्होंने धमकियों के बाद भी चुनावों में हिस्सा लिया। भाजपा के सदस्य चुनावों के अलगाववादी बहिष्कार के कारण निर्विरोध जीतने में सफल रहे लेकिन उन्हें प्रवासी कश्मीरी पंडितों के बहुत मत प्राप्त हुए, जिन्होंने जम्मू के शिविरों में लगे मतदान केंद्र में जाकर मत दिया।

अब वह राज्य सरकार से सुरक्षा तथा व्यवस्थित आवास की माँग कर रहे हैं।

“यह निर्वाचित सदस्य कश्मीर से पिछले 28 वर्षों से विस्थापित हैं, इस कारण इनके पास रहने के लिए आवास नहीं है। सरकार ने इन्हें आवास तथा सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई है जिससे वे अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने में असमर्थ हैं।”, विधान परिषद के सदस्य जी एल रैना ने कहा।

रैना, भाजपा के राज्य महासचिव भी हैं, उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मामले में हस्तक्षेप करने की विनती की है।

कश्मीर घाटी के नव निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को एक तंत्र की भी आवश्यकता है जिससे वे मिली हुई धनराशि को जगती, मुठी, नगरोटा तथा अन्य शिविरों में रह रहे प्रवासी कश्मीरी पंडितों के लाभ हेतु खर्च कर सकें।