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तारावीह की नमाज़ पर अड़े उलेमाओं के आगे झुकी पाकिस्तान सरकार, मस्जिदें खुलेंगी

रमज़ान के दौरान तारावीह नमाज़ मस्जिद में कराने की मांग पर अड़े उलेमाओं के आगे पाकिस्तान की इमरान खान सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा। उसने मस्जिदें खोलने की स्वीकृति दे दी है। सरकार के इस निर्णय से विपक्ष और कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सकों में गुस्सा है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उलेमाओं ने राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के साथ बैठक करके 20 सूत्रीय समझौता किया, जिसके तहत अब वहाँ रमज़ान में मस्जिद खुले रहेंगे। वहाँ लॉकडाउन में भी मस्जिदों में भीड़ देखी गई। कराची में तो भीड़ को रोकने गई पुलिस पर हमला कर दिया गया।

चिकित्सकों ने आरोप लगाया है कि सरकार अपना काम नहीं कर पा रही है। इस वजह से चिकित्सकों को उनका काम करना पड़ रहा है और वे लोगों को जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने मस्जिद खोलने के फैसले के खिलाफ जाकर कहा कि धर्म किसी को बीमार होने के लिए नहीं कहता है।

सिंध अस्पताल के मुख्य कार्यकारी डॉक्टर अब्दुल बरी ने कहा, “हम सिर्फ सरकार के निर्णय की समीक्षा ही कर सकते हैं। जिस तरह के हालात देश में बन रहे हैं, उससे हम निपटने की स्थिति में नहीं हैं। रमज़ान के दौरान किया गया यह समझौता विकट स्थिति पैदा करेगा।”

पूर्व सांसद बुशरा गौहर कहती हैं, “सरकार समय रहते आपातकाल लागू कर सकती थी लेकिन उसने रायविंड में तबलीगियों के जमावड़े को रोकने के लिए कुछ नहीं किया, जिसने पूरे देश में कोरोना फैला दिया।” मस्जिद खोलने के निर्णय पर पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो ने भी इमरान खान सरकार की आलोचना की।