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पाकिस्तान- लॉकडाउन में हिंदू, ईसाई लड़कियों का सबसे अधिक हुआ जबरन धर्मांतरण

पाकिस्तान में हर वर्ष हजारों अन्य धर्म की लड़कियों को इस्लाम अपनाने पर विवश किया जाता है। इनमें कम उम्र की किशोरियाँ भी हैं। ऐसी ही 14 वर्षीय नेहा है, जिसका ईसाई से धर्म बदलकर इस्लाम कर दिया गया। उसका अपने से दोगुने उम्र के बच्चों के पिता से निकाह करवाया गया। अब पति कम उम्र की लड़की से शादी और दुष्कर्म के आरोप में जेल में है पर उसका भाई उसे मारना चाहता है।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है, “लॉकडाउन में ऐसे अपराधों में तेज़ी आई। उनकी तस्करी करने वाले सक्रिय हैं और उनके गरीब परिवार ऋण में लदे हुए हैं। इस वजह से अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दिसंबर में पाकिस्तान को धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिता वाले देशों की श्रेणी में रखा है।”

अमेरिकी कमीशन ने कहा था, “कम उम्र में अल्पसंख्यक हिंदू, ईसाई, सिख लड़कियों का अपहरण होता है। उन्हें जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है। फिर निकाह के बाद दुष्कर्म किया जाता है। धर्मांतरण का शिकार अधिकतर लड़कियाँ सिंध प्रांत में गरीब हिंदू परिवारों से हैं।”

पाकिस्तान के स्वतंत्र मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक, धर्मांतरण के बाद लड़कियों का विवाह उनसे अधिक उम्र के लोगों से होता है। बाल संरक्षण कार्यकर्ता कहते हैं, “जबरन धर्मांतरण पैसों के बल पर होता है। इनमें मौलवी, निकाह को वैधता देने वाले मजिस्ट्रेट और भ्रष्ट पुलिसवाले शामिल होते हैं।”

देश की 22 करोड़ आबादी में अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत है। जबरन धर्मांतरण के खिलाफ जो शिकायत करते, उन्हें ईशनिंदा के आरोपों में निशाना बनाया जा सकता है। एक हिंदू कार्यकर्ता ने बताया, “13 वर्षीय किशोरी का जबरन धर्मांतरण करवाया गया। शिकायत की तो बाद में दबाव में उस परिवार को लिखना पड़ा कि बेटी ने मर्ज़ी से धर्म बदला है। उसका विवाह 36 वर्षीय दो बच्चों के पिता से करवा दिया गया।”