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मलेशिया, तुर्की और चीन के कारण काली सूची से बचे पाकिस्तान ने भारत पर लगाया आरोप

वित्तीय संकट से जूझ रहा पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की काली सूची में जाने से बच गया। यह मलेशिया, तुर्की और चीन के समर्थन से हुआ। इसके बाद उसने भारत पर एफएटीएफ में अपने संकीर्ण और पक्षपातपूर्ण विचारों की राजनीति करने का आरोप लगाया।

द इकोनॉमिक टाइम्स  की रिपोर्ट के अनुसार, एफएटीएफ ने फ्लोरिडा में एक सप्ताह तक चली बैठक के दौरान पाकिस्तान को उसके यहाँ पनपने वाले आतंकवाद को आश्रय देने और आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकने से संबंधित वैश्विक चिंताओं को दूर करने के लिए ज़रूरी कदम उठाने को कहा था।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा था, “हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान एफएटीएफ के लिए अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के अनुसार सितंबर 2019 तक शेष समय सीमा के भीतर पूरी तरह से आवश्यक कदम उठाएगा।”

इस पर पड़ोसी देश के विदेश कार्यालय ने कहा, “वह भारत द्वारा एफएटीएफ रिपोर्ट के बारे में जारी किए गए बयान को अनुचित मानता है। यह एफएटीएफ के निर्णय को अपने संकुचित और पक्षपातपूर्ण उद्देश्यों के लिए राजनीतिक बनाने के भारत के प्रयासों का एक नया उदाहरण है।”

बैठक के अंत में एफएटीएफ ने कहा था, “पाकिस्तान न सिर्फ अपनी जनवरी की समय सीमा की कार्य योजना को लागू करने में असफल रहा बल्कि उसने मई 2019 में भी कार्य योजना लागू नहीं की। वह अंतिम समय सीमा से पहले कार्य योजना लागू करे। अगर ऐसा नहीं कर पाता है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा।”

पाकिस्तान को उन देशों की काली सूची में रखा गया, जो घरेलू कानून, जून 2018 में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण की चुनौतियों से निपटने के लिए कमजोर माने जाते हैं। एक अनुमान लगाया गया है कि प्रतिबंध के चलते उसकी अर्थव्यवस्था को सालाना 10 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।