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विदेशों में विकसित व निर्मित वैक्सीन का मूल्यांकन के बाद भारत में हो सकेगा उपयोग

महामारी से लड़ने के लिए उपलब्ध होने वाली वैक्सीन की खेपों में वृद्धि करने के साथ घरेलू टीकाकरण कार्यक्रम को गति देने के लिए 11 अप्रैल को नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 (एनईजीवीएसी) की 23वीं बैठक नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ वीके पॉल की अध्यक्षता में हुई।

एनईजीवीएसी ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद कोविड-19 के लिए टीके लगाने की सिफारिश की, जिन्हें विदेशों में विकसित व निर्मित किया जा रहा है। उन्हें यूएसएफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए, पीएमडीए जापान द्वारा उपयोग के लिए आपातकालीन स्वीकृति दी गई है या उन्हें डब्ल्यूएचओ (आपातकालीन उपयोग सूचीकरण) में सूचीबद्ध किया गया है।

ऐसे में उन्हें भारत में आपातकालीन उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। यह न्यू ड्रंग्स एंड क्लीनिकल ट्रायल नियम 2019 की दूसरी अनुसूची के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार स्थानीय क्लीनिकल परीक्षण के संचालन के स्थान पर सिफारिश के बाद समानांतर नैदानिक ​​परीक्षण की आवश्यकता को अनिवार्य करके हो सकता है।

वहीं, इससे पहले कि ये वैक्सीन देश में आगे के टीकाकरण कार्यक्रम के लिए तैयार की जाएँ, ऐसे विदेशी टीकों को 100 लाभार्थियों को दिया जाएगा और सुरक्षा परिणामों के लिए उनका मूल्यांकन किया जाएगा। केंद्र सरकार ने उचित विचार-विमर्श के बाद एनईजीवीएसी की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है।

इस निर्णय से भारत द्वारा ऐसे विदेशी टीकों तक तुरंत पहुँच बढ़ाई जा सकेगी और थोक दवा सामग्री के आयात, घरेलू भरण व समाप्ति क्षमता आदि के उपयोग सहित आयात को बढ़ावा मिलेगा, जो बदले में वैक्सीन निर्माण क्षमता व देश में कुल वैक्सीन उपलब्धता के लिए एक पूरक प्रदान करेगा।