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“एलआईसी का निजीकरण नहीं, आईपीओ सिर्फ निवेश बढ़ाने के लिए”- अनुराग ठाकुर

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार का जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के निजीकरण का इरादा नहीं है।

उन्होंने बताया कि जीवन बीमाकर्ता की प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) की योजना सिर्फ बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और आगे के निवेश को आकर्षित करने के लिए बनाई गई है। इससे बीमा धारकों के लिए बेहतर संभावनाएँ पैदा होंगी।

लोकसभा में बोलते हुए अनुराग ठाकुर ने साफ किया कि एलआईसी के शेयर कमज़ोर पड़ने का अब तक पता नहीं चला है। साथ ही उल्लेख किया कि प्रस्तावित आईपीओ के कारण कोई भी अपनी नौकरी नहीं खो रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को याद दिलाया कि नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान बैंकों को ऋण अदायगी पर रोक लगा दी थी। इस वजह से वे उन लोगों को भी राहत दे सकते हैं, जो एलआईसी प्रीमियम भुगतान जारी रखने में समस्या का सामना कर रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आगे कहा, “बीमा कंपनी ने 2017-18 में 48,436 करोड़ रुपये का अधिशेष उत्पादित किया था और अपने पॉलिसी धारकों के साथ उस राशि में से 46,014 करोड़ रुपये साझा किए थे। बाकी 2,421 करोड़ रुपये सरकार ने रखे थे।”

इसी तरह एलआईसी ने 2019-20 में 53,954 करोड़ रुपये का अधिशेष उत्पादित किया था। सामान्य बीमाकर्ता ने अपने पॉलिसी धारकों के साथ 51,257 करोड़ रुपये साझा किए, जबकि सरकार ने शेष 2,697 करोड़ रुपये रखे थे।