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यूरोपीय संघ ने ईयू संसद के सीएए-विरोधी “अनाधिकारिक” प्रस्ताव से खुद को किया अलग

भारत के सीएए के खिलाफ यूरोपीय संघ (ईयू) ने मसौदा प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए ईयू की संसद की योजनाओं से खुद को अलग कर लिया। उसने कहा, “संसद और उसके सदस्यों की राय यूरोपीय संघ की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती।”

द इंडियन एक्सप्रेस की की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को यूरोपीय संघ की संसद में छह राजनीतिक समूहों ने सीएए पर आपत्ति जताकर प्रस्ताव पारित किया, जिससे कइयों ने दूरी बना ली।

ईयू के प्रवक्ता विर्जिनी बाट्टू-हेरिक्सन ने कहा, “यूरोपीय संसद भारत सरकार द्वारा लाए गए कानून पर एक बहस करने की योजना बना रही है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय इसकी संवैधानिकता का आँकलन कर रहा है। अपनी नियमित प्रक्रियाओं के अनुसार, यूरोपीय संसद ने मसौदा प्रस्तावों को प्रकाशित किया। हालाँकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सिर्फ यूरोपीय संसद में विभिन्न राजनीतिक समूहों द्वारा बनाए गए मसौदे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “यूरोपीय संसद और उसके सदस्यों द्वारा व्यक्त की राय यूरोपीय संघ की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती। यूरोपीय संघ ब्रसेल्स में 13 मार्च 2020 को भारत के साथ अपनी सामरिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए 15वें शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। भारत ईयू के लिए वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने और बहुपक्षीय व्यवस्था के नियमों को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।”

फ्रांस ने भी सीएए को लेकर भारत के आंतरिक राजनीतिक मामले में नए संशोधन पर विचार किया है। द इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों का कहना है, “यूरोपीय संघ और फ्रांस द्वारा यह कदम नई दिल्ली के बाद राजनयिक रूप से ईयू और उसके सांसदों से जुड़ा है।” लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस कदम की आलोचना की। साथ ही उन्होंने भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप ना करने को कहा है।