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सिर्फ गंगा ही नहीं- यमुना नदी की सेवा में ‘नमामि गंगे’, सुधरेगा सीवेज इन्फ्रा

15 फरवरी (2019) को नमामि गंगे की 20वीं कार्यकारी समिति की बैठक में सीवरेज के बुनियादी ढाँचे और 1,387 करोड़ रुपये की अन्य परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई जो यमुना नदी के किनारे बसे शहरों में पूर्ण की जाएगी।

सीवेज उपचार संयंत्रों (एसटीपी) के निर्माण और नवीनीकरण जैसी परियोजनाओं की ऑनलाइन निगरानी प्रणाली को भी ध्यान में रखा जाएगा।

इटावा शहर में 140.6 करोड़ रुपये का उपयोग टिक्सी नाले के अवरोधन और उनको मोड़ने के लिए किया जाएगा, क्लोरिनीकरण सिस्टम सहित मौजूदा एसटीपी का उन्नयन, प्रति दिन 2.1 करोड़ लीटर सीवेज उपचार क्षमता के लिए एक नया एसटीपी तैयार करने हेतु भी किया जाएगा। इसी तरह की परियोजनाओं को मेरठ में 681.78 करोड़ रुपये की लागत से निष्पादित किया जाएगा।

एक सरकारी रिपोर्ट में बताया गया– “कार्यकारी समिति ने आगरा में 317.2 करोड़ रुपये की सीवरेज परियोजनाओं को मंज़ूरी दी। इसमें 6 एसटीपी की ऑनलाइन निगरानी, ​​मौजूदा 15 सीवेज पंपिंग स्टेशनों के स्वचालन, सीवेज पंपिंग स्टेशनों के नवीनीकरण और 29 नाला टेपों के संचालन और रखरखाव शामिल हैं।

समिति ने फिरोज़ाबाद के लिए 51.08 करोड़ रुपये और बागपत के लिए 77.36 करोड़ रुपये आवंटित किए। उत्तर प्रदेश (यूपी) के चुनार शहर को  2.7 करोड़ रुपये मल प्रबंधन और प्रदूषण में कमी के लिए दिए।

सीवेज का शून्य बहाव

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के अधिकारियों के अनुसार प्राचीन शहर वाराणसी के पास गंगा में इस साल नवंबर (2019) तक शून्य सीवर का बहाव होगा।

रमना में 50 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर काम पूरा होने वाला है। इस साल नवंबर तक यह असी नाला के निर्वहन के लिए पूरी तरह से चालू हो जाने की उम्मीद है। इसके साथ ही वाराणसी शहर से गंगा में अनुपचारित सीवर के पानी के प्रवाह को पूरी तरह से जाँच लिया जाएगा,” एनएमसीजी अधिकारियों ने कहा।