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“बांग्लादेश में और रोहिंग्या मुसलमानों को शरण नहीं दी जाएगी”- मंत्री अब्दुल मोमन

बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन ने बताया कि अब हम और रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों को यहाँ आने नहीं देंगे। पता चला है कि सैकड़ों शरणार्थी देश में प्रवेश करने के लिए समुद्र के रास्ते में फंसे हुए हैं। एफे न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा कोविड-19 के अलावा सामान्य स्थिति के लिए भी है।

बुधवार को पता चला कि करीब 500 रोहिंग्या महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को लाने के लिए दो जहाज बंगाल की खाड़ी में थे। 15 अप्रैल को करीब 400 रोहिंग्या शरणार्थियों को वहाँ ले जाने वाले पहले पोत के एक सप्ताह बाद दोनों जहाज बांग्लादेश की ओर जा रहे हैं।

मोमन ने स्वीकारा कि उन्हें दो नावों की जानकारी है। उन्होंने कहा, “सरकार की प्राथमिकता शरणार्थी शिविर क्षेत्र की सुरक्षा करना है, जहाँ वर्तमान में हजारों रोहिंग्या रह रहे हैं। यह भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र है। अगर यहाँ कोई संक्रमित व्यक्ति आया तो सब बर्बाद कर देगा।”

उन्होंने कहा, “अराकन और म्यांमार सेना के बीच म्यांमार के राखीन राज्य में चल रही अशांति बांग्लादेश में रोहिंग्या मुसलमानों की वापसी का बड़ा कारण है। मंत्री ने म्यांमार का समर्थन करने के लिए यूरोपीय संघ और ब्रिटिश सरकार की आलोचना की। साथ ही वैश्विक नेतृत्व और अमेरिका से रोहिंग्या की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया।

यूएनएचसीआर की एशिया और प्रशांत के क्षेत्रीय ब्यूरो की निदेशिका इंद्रिका रत्वाटे ने कहा, “कोविड-19 महामारी के बीच सभी राज्यों को अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखना चाहिए लेकिन शरण के रास्ते बंद भी नहीं करने चाहिए या लोगों को खतरे की तरफ ढकेलने पर मजबूर नहीं करना चाहिए।”

16 अप्रैल को बांग्लादेश में 396 रोहिंग्या को बचाया गया, जो 58 दिनों के बाद समुद्र में दक्षिणी तट से देश में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारियों ने उनके शिविरों में कोरोनावायरस का कोई भी मामला नहीं बताया है।