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दिल्ली में भागीदार, नोएडा एयरपोर्ट के लिए प्रतिस्पर्धी- एएआई और जीएमआर की बोली

दिल्ली एयरपोर्ट चला रहे संयुक्त उद्यम भागीदार एएआई और जीएमआर समूह ग्रेटर नोएडा हवाई अड्डे के लिए बोली प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही प्रतिद्वंद्वियों में बदल सकते हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा, “हवाई अड्डे की बोली प्रक्रिया में शामिल होने के लिए एएआई कानूनी राय ले रहा है। वह योजना पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय से भी परामर्श कर रहा है।” दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड अपने 26 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले एएआई को बोली में पछाड़ने में लगा है। जीएमआर समूह के नेतृत्व वाली फर्म ने पहले ही कानूनी राय ले ली है।

एएआई अधिकारी ने कहा, “राज्य सरकार की बोली प्रक्रिया में वह भी ग्रेटर नोएडा हवाई अड्डे की दौड़ में शामिल होना चाहता है। हम कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श करेंगे और मंत्रालय में भी इस पर चर्चा कर रहे हैं।”

इंफ्रास्ट्रक्चर प्रमुख जीएमआर के पास किसी हवाई अड्डे के लिए पहले इनकार (आरओएफआर) का अधिकार है, जो दिल्ली में मौजूदा हवाई अड्डे के 150 किमी के हवाई दायरे में बनाया गया है। आरओएफआर की शर्तों के अनुसार, यदि जीएमआर के नेतृत्व वाली संयुक्त उद्यम फर्म प्रतिस्पर्धी बोली में दूसरा हवाई अड्डा नहीं हासिल करती है तो उसे पहले स्थान पर आने वाली बोली से मिलान करने की अनुमति दी जाएगी क्योंकि यह 10 प्रतिशत के दायरे में है।

विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञ ग्रेटर नोएडा हवाई अड्डे के लिए बोली में भाग लेने वाली अधिक संस्थाओं के पक्ष में हैं। वह एएआई को जीएमआर समूह के साथ अपनी बोली लगाने का समर्थन करते हैं।

पीडब्ल्यूसी के हिस्सेदार धीरज माथुर ने कहा, “अधिक बोलियों का मतलब अधिक प्रतिस्पर्धा है। यह सरकार के लिए अच्छा होगा। एएआई कई हवाई अड्डों का प्रबंधन कर रहा है, जो लाभदायक नहीं हैं। यदि यह ग्रेटर नोएडा हवाई अड्डे को प्राप्त करता है तो यह कम लाभकारी या नुकसान में रहने वाला हवाई अड्डा साबित होगा।”