समाचार
“सीपेक में पारदर्शिता नहीं, सिर्फ पाकिस्तान का आर्थिक बोझ बढ़ाएगा”- एलिस वेल्स

दक्षिण एशियाई क्षेत्रों के मामलों के लिए अमेरिका की मुख्य राजनयिक एलिस वेल्स ने बुधवार (22 जनवरी) को चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपेक) की आलोचना करते हुए कहा, “इस परियोजना में कोई पारदर्शिता नहीं है।”

वियन न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, एलिस वेल्स ने पाकिस्तान में एक कार्यक्रम में कहा, “अरबों रुपये के प्रोजेक्ट के तहत उन कंपनियों को अनुबंध दिया गया, जिन्हें वर्ल्ड बैंक ने काली सूची में डाला है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सीपेक में कोई पारदर्शिता नहीं है।

वेल्स ने दावा किया कि चीनी वित्तपोषण से पाकिस्तान पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। यह उसके कर्ज के बोझ को और बढ़ाएगा। उन्होंने कहा, “परियोजनाओं के लिए चीनी वित्तपोषण प्राप्त करने से पाकिस्तान महंगे ऋण खरीद रहा था। उसे एक खरीदार के रूप में यह पता होना चाहिए कि वह जो कर ले रहा था, उससे अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।”

बता दें कि 21 नवंबर 2019 को प्रतिष्ठित वुडरो विल्सन इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्कॉलर्स में बोलते हुए भी वेल्स ने इस बात का ज़िक्र किया था कि बहु-अरब डॉलर की पहल गैर-रियायती ऋण द्वारा संचालित थी। उन्होंने कहा था, “सीपेक पाकिस्तान की बढ़ती बेरोजगारी के बीच में भी मुख्य रूप से चीनी श्रमिकों और आपूर्ति पर निर्भर करता है।”

वेल्स ने कहा, “सीपेक से केवल बीजिंग को फायदा होगा और अमेरिका ने बेहतर मॉडल पेश किया था। “यह स्पष्ट है कि सीपेक सहायता के लिए नहीं है।”

कई जानकारों का मानना ​​है कि सीपेक एक कर्ज का जाल है, जो पाकिस्तान की बेरोजगारी को सिर्फ बढ़ाएगा क्योंकि चीन मुख्य रूप से अपने नागरिकों और आपूर्ति का इस्तेमाल कर रहा है। कुछ वर्षों में यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर डालेगा, जब उसे अगले चार से छह वर्षों में बहुत अधिक ब्याज दर पर ऋण को चुकाना होगा।