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व्यावसायिक सरोगेसी को रोकने के लिए विधेयक पारित, रिश्तेदार होना आवश्यक

2016 से लंबित रहा सरोगेसी (नियामक) विधेयक कल (20 दिसंबर को) लोकसभा में पारित हो गया। इसका मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक सरोगेसी तथा उससे जुड़े अनैतिक व्यवहारों पर रोक लगाना है, ऑल इंडिया रेडियो  न्यूज़ की रिपोर्ट में बताया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, सरोगेसी की अनुमति उन दंपत्तियों को ही दी जाएगी जो खुद का बच्चा पैदा करने में असमर्थ हैं। उन दंपत्तियों का भारतीय होना आवश्यक है तथा अनुमति के लिए शादी को पाँच वर्ष पूर्ण होना जरूरी है साथ ही उनमें से एक साथी को इंफर्टायिल (बांझ) होना भी आवशयक है। वहीं सरोगेट मदर एक नज़दीकी रिश्तेदार हो सकती है जो खुद शादी-शुदा हो तथा उसका खुद का एक बच्चा हो।

केंद्रीय स्वास्थ मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि महिला तथा बच्चे की गरिमा का ध्यान रखते हुए सभी सदस्यों ने सदन में अपनी बात कही है। उनके अनुसार यह विधेयक व्यावसायिक सरोगेसी पर पूर्ण पाबंदी लगाने के लिए पारित किया गया है।

गौरतलब है कि भारत व्यावसायिक सरोगेसी का बड़ा बाज़ार बन रहा था जिसे खत्म करने में यह विधेयक सहायक होगा। विधेयक में राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड, राज्य सरोगेसी बोर्ड का गठन तथा विनियमन के लिए अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान है।