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गृह मंत्रालय की सफाई- किसी भी संस्था को फ़ोन, ई-मेल अवरोधन के सर्वाधिकार नहीं

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि किसी भी संस्था को किसी कंप्युटर से जानकारी निकालने के लिए सर्वाधिकार नहीं दिए गए हैं और उन्हें वर्तमान के नियमों को सख्ती से पालन करना पड़ेगा, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस  ने रिपोर्ट किया। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “कोई नया कानून नहीं लाया गया है, कोई नए नियम नहीं हैं, प्रक्रिाओं में परिवर्तन नहीं किया गया है और न ही किसी संस्था को सर्वाधिकार नहीं मिले हैं।”

गृह मंत्रालय से 20 दिसंबर को दस संस्थाओं की सूची के साथ एक अधिसूचना जारी की थी जिसके कारण विवाद उत्पन्न हुआ और विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार एक निगरानी तंत्र स्थापित कर रही है। सरकार ने यह स्पष्ट किया था कि डाटा अवरोधन और जाँच के नियम 2009 में यूपीए सरकार द्वारा बनाए गए थे और हाल ही में जारी किए गए निर्देश का उद्देश्य मात्र उन संस्थाओं को सूचित करने का था जो इससे संबंधित कार्यवाही कर सकती हैं।

हालाँकि, अधिकारी ने यह भी बताया कि मोबाइल कनेक्शन की संख्या बढ़ने के बावजूद 2014 से अवरोधन की संख्या में कमी आई है।