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मुकेश फाँसी से बचने के लिए पहुँचा दिल्ली उच्च न्यायालय, निचली अदालत को दी चुनौती
आईएएनएस - 18th March 2020

निर्भया मामले के चार दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। मुकेश ने दावा किया था कि 16 दिसंबर 2012 को वारदात वाले दिन वह दिल्ली में मौजूद नहीं था।

दोषी के वकील एमएल शर्मा के माध्यम से दायर याचिका पर निचली अदालत के आदेश को अलग रखने की माँग की गई। 17 मार्च को मुकेश ने पटियाला हाउस अदालत में एक याचिका दायर की थी। इसमें इस बहाने के जरिए उसकी मौत की सजा को रद्द करने की मांग की गई थी कि अपराध वाले दिन वह दिल्ली में मौजूद नहीं था।

मुकेश ने दावा किया था कि उसे राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था और घटना के एक दिन बाद 17 दिसंबर 2012 को दिल्ली लाया गया था। लोक अभियोजन इरफान अहमद ने इस पर जवाब देते हुए न्यायालय को बताया था कि ऐसा जानबूझकर दोषी को फांसी देने में देरी करने के लिए किया जा रहा है।

तर्कों के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने याचिका खारिज कर दी और कहा, “मुझे यह उचित लगता है कि दोषी के लिए वकील के आचरण को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के ध्यान में लाया जाना चाहिए। न्यायालय के समक्ष वकील ने न केवल गलत बयानबाजी की बल्कि वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में भी बुरी तरह से विफल रहे हैं। वह जानबूझकर गलत धारणा पैदा कर रहे हैं।”

न्यायालय ने कहा, “यह सुनिश्चित करने के लिए अदालत को पूर्ण सहयोग और सहायता प्रदान करना बार का कर्तव्य था कि वादकारियों को बिना किसी अनावश्यक देरी के न्याय दिया जाए।” मुकेश के अलावा अन्य तीन दोषियों अक्षय, पवन और विनय को 20 मार्च को सुबह 5.30 बजे मौत की सजा दी जाएगी।