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निर्भया मामले के दोषी विनय की सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका की खारिज, फाँसी तय

राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने पर सवाल उठाते हुए निर्भया मामले में दोषी विनय शर्मा ने फाँसी की सजा टालने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी, जिसे शुक्रवार को खारिज कर दिया गया। इस तरह आरोपी की फाँसी की सज़ा का रास्ता साफ हो गया है।

हिंदुस्तान लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, एएस बोपन्ना के साथ न्यायमूर्ति आर भानुमति की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर फैसला सुनाया। विनय ने खुद को मानसिक तौर पर बीमार बताते हुए फांसी टालने की मांग की थी। इसके बाद न्यायालय ने उसे मानसिक तौर पर फिट बता दिया।

दोषी विनय के वकील ने न्यायालय में याचिका के जरिए दावा किया था कि उसके मुवक्किल को जेल में यातनाएँ दी जाती थीं, जिससे वो मानसिक रूप में बीमार हो गया है। इस लिहाज से मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने का अनुरोध किया गया। न्यायालय ने चिकित्सकीय रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि दोषी मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है। रिपोर्ट में उसकी स्थिति स्थिर आई है।

उधर, दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को निर्भया दुष्कर्म मामले में डेथ वॉरंट जारी करने की याचिका पर सुनवाई 17 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने माना कि दोषी अपने कानूनी उपायों को उपयोग करने के हकदार हैं। उनके मौलिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती है।

अदालत ने मामले में अधिवक्ता रवि काजी को दोषियों में से एक पवन गुप्ता की ओर से प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया था। चारों दोषियों में से सिर्फ पवन के पास ही सुधारात्मक और दया याचिका का विकल्प है।