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निर्भया कांड- दोषी पवन के नाबालिग होने वाली याचिका सर्वोच्च न्यायालय ने की खारिज

निर्भया के गुनहगारों में से एक पवन गुप्ता की याचिका सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दी। न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को 2012 में बालिग मानते हुए यह निर्णय सुनाया।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने कहा, “यह मामला पहले भी उठाया गया और निचली अदालतों ने इसे खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय का निर्णय सही था। याचिका में कोई भी बात पुख्ता नहीं मिलती है। इस वजह से याचिका खारिज की जाती है।”

इससे पहले, सुनवाई के दौरान दोषी पवन के वकील एपी सिंह ने उसका स्कूल सर्टिफिकेट दिया। इस पर न्यायाधीश ने कहा, “इसी के आधार पर आरोपी को 2017 में दोषी करार दिया गया था।”

न्यायाधीश भानुमति ने पूछा, “पवन की उम्र को लेकर जो प्रश्न उठ रहे हैं उसकी सुनवाई पहले हो चुकी है।” इस पर दोषी के वकील ने कहा, “उसने इस संबंध में याचिका डाली थी। महाधिवक्ता ने इस पर कहा, “याचिका उन्हीं दस्तावेजों पर डाली गई है, जिन पर पहले सुनवाई हुई थी।”

दोषी के वकील ने नए दस्तावेजों की बात कही लेकिन न्यायालय इस पर सहमत नहीं दिखा। न्यायाधीश भानुमति ने कहा, “अगर आप इस तरह याचिकाएँ लगाते रहेंगे तो यह सिलसिला कभी खत्म ही नहीं होगा।”

दोषी के वकील ने कहा, “मामले में जल्दबाजी करते हुए चार्जशीट पेश की गई और आदेश आया। इसमें दोषी के नाबालिग होने पर ध्यान ही नहीं दिया गया। महाधिवक्ता ने मजिस्ट्रेट के आदेश को पढ़कर सुनाया जिसमें कहा गया था, ‘आरोपी ने उम्र को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई है।’ कई देर बहस होने के बाद 2.30 बजे फैसला सुरक्षित रख लिया गया, जिसके बाद याचिका खारिज कर दी गई।