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एनसीपी की भीमा-कोरेगाँव को लेकर दर्ज मामले वापस लेने की मांग, उद्धव ठाकरे सहमत

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भीमा-कोरेगाँव हिंसा के संबंध में दलित कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर सहमति व्यक्त कर दी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एनसीपी कैबिनेट के सदस्य जयंत पाटिल और छगन भुजबल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ठाकरे से मुलाकात कर मांग की कि भीमा-कोरेगाँव हिंसा के संबंध में दलित कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले वापस लिए जाएँ। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी दावा किया था कि कार्यकर्ताओं पर इस मामले में झूठे आरोप लगाए गए थे।

इसके जवाब में उद्धव ठाकरे ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिया कि मामलों को जल्द से जल्द वापस ले लिया जाएगा। उन्होंने पहले ही उन कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामलों को वापस ले लिया है, जो आरे मेट्रो शेड और नानार रिफाइनरी के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे।

इससे पूर्व, एनसीपी विधायक धनंजय मुंडे ने ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा था कि देवेंद्र फडणवीस की अगुआई में सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं को “परेशान” किया गया था और उन्हें “शहरी नक्सली” कहा गया था।

फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने पहले आरोपियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने का फैसला किया था, जो घटना के संबंध में मामूली आरोपों का सामना कर रहे थे।