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आईएमए की देशव्यापी हड़ताल शुरू, सुरक्षा को लेकर केंद्रीय कानून की माँग

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सोमवार को अस्पतालों में हिंसा से निपटने के लिए एक व्यापक केंद्रीय कानून की माँग को लेकर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमए ने आपात सेवाओं को हड़ताल से अलग रखा है। ओपीडी समेत गैर-जरूरी सेवाएं सुबह 6 से मंगलवार सुबह 6 बजे तक बंद करके दिल्ली में सुबह दस बजे से धरना देना शुरू कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट के विरोध में आईएमए ने पिछले शुक्रवार (14 जून) को तीन दिवसीय देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। आंदोलनकारी डॉक्टरों ने कहा था, “बंगाल के किसी भी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में तब तक कोई काम नहीं होगा, जब तक राज्य सरकार पूरी सुरक्षा का भरोसा नहीं देती है।”

दिल्ली में सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से मुलाकात की थी। उन्होंने अस्पताल परिसर में किसी भी तरह की हिंसा न होने और डॉक्टरों की सुरक्षा सुरक्षा की माँग की थी।

इस पर मंत्री हर्षवर्धन ने राज्यों से कहा, “वे किसी भी प्रकार की हिंसा से चिकित्सकों की रक्षा के लिए विशिष्ट कानून बनाने पर विचार करें।” आईएमए ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा की जाँच के लिए एक केंद्रीय कानून बनाने की माँग की थी।

15 जून को हर्षवर्धन ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक पत्र के साथ आईएमए द्वारा दिए गए ड्राफ्ट अधिनियम की एक प्रति भी भेजी। इसमें चिकित्सा सेवा व्यक्तियों और चिकित्सा सेवा संस्थानों की सुरक्षा (हिंसा और क्षति की रोकथाम या संपत्ति का नुकसान) अधिनियम 2017 की बात कही गई है।