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म्यांमार में असम और मणिपुर के 24 उग्रवादियों को सेना ने पकड़ा, दो साल की कैद

असम और मणिपुर के 24 उग्रवादियों को म्यांमर की एक जिला अदालत ने देश के गैरकानूनी संस्था अधिनियम के तहत दो साल की कैद की सजा सुनाई है। टाइम्स ऑफ इंडिया  की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय समूहों के खिलाफ कार्रवाई में सेना ने जनवरी में उग्रवादियों को उनके ठिकानों से गिरफ्तार किया था।

म्यांमार के सागांग क्षेत्र में हकमती अदालत द्वारा जेल भेजे गए उग्रवादियों के संबंध मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए), यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा), कंगाली यवोल कन्ना लूप (केवाईकेएल), पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ऑफ मणिपुर (पीएलए) और पीपुल्स रिवॉल्यूशनरी पार्टी ऑफ कंगालीपाक (पीआरईपीएके) से हैं।

नॉर्थ वेस्टर्न कमांड के कर्नल थान नाविंग ने म्यांमार के दैनिक द इरावाडी में कहा, ‘हमने अनुच्छेद 17 (1) के तहत उग्रवादियों पर मुकदमा चलाया क्योंकि वे विद्रोही थे।’

जनवरी में म्यांमार सेना ने नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड – खापलांग (एनएससीएन-के) के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की थी। म्यांमार की उत्तरी पश्चिमी कमान की सेना ने 29 जनवरी को सागांग सीमा के स्व-प्रशासित क्षेत्र नागांग में स्थित एनएससीएन-के के मुख्यालय पर छापा मारा था। वहाँ भारतीय उग्रवादी ठहरे हुए थे। वहाँ से असम और मणिपुर के 24 उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया था।

टीओआई  ने एक सुरक्षा सूत्र के हवाले से बताया, “वहाँ पर अब भी उनकी धरपकड़ जारी है। भारत-म्यांमार सीमा के साथ होयल और लोनियु गांव के पास गनधारी उग्रवादियों के मौजूद होने की सूचना है।