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“एसआई ने भीड़ से साथियों को छोड़ने की गुहार लगाई पर कोई रुका नहीं”- मोहित शर्मा

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन में शुक्रवार (20 दिसंबर) को विशेष संचालन समूह (एसओजी) का एक कॉन्सटेबल घायल हो गया था। अब उसने खुद और साथियों पर भीड़ द्वारा हुए खौफनाक हमले की पूरी जानकारी दी है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मोहित शर्मा के रूप में पहचाने जाने वाले कॉन्सटेबल को हजारों प्रदर्शनकारियों की हिंसक भीड़ ने घेर लिया था, जिसमें से किसी ने उन्हें गोली मारी थी।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि पत्थरों और हथियारों से लैस भीड़ में युवा और बुजुर्ग दोनों शामिल थे। भीड़ ने पुलिस को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से घेर लिया था। इस तरह लाठी से लैस पुलिस भी हिंसक प्रदर्शनकारियों के सामने बेबस साबित हो गई थी।

मोहित शर्मा उस खौफनाक मंज़र को याद करते हुए बताते हैं, “पत्थरबाजी की खबरों के बाद मैं और मेरे साथी करीब 2.30 बजे नाहर गाँव पहुँचे थे। वहाँ पर हमने बहुत ज्यादा लोगों को देखा और उसके बाद उनके हमलों से बचने के लिए एक गली में घुस गए थे।”

शर्मा ने दावा किया, “भीड़ ने उन्हें घेर लिया और निर्दयतापूर्वक मारना-पीटना शुरू कर दिया था। इस बीच असहाय सब-इंस्पेक्टर (एसआई) राकेश कुमार ने भीड़ से गुहार लगाई कि वे उनके साथियों की बजाए उन्हें मार सकते हैं।”

इस दौरान किसी ने शर्मा के पेट में गोली मार दी और वह गिर गए। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। हमले में एसआई राकेश कुमार को भी गहरी चोटें आई हैं।

शर्मा 108 बटालियन के हैं। उन्हें अस्पताल से अभी छुट्टी नहीं दी गई है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा बल को बुलेट प्रूफ जैकेट दी गई थी, ताकि वे भीड़ को बेहतर तरीके से संभाल सकें।