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मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज़ के लिए अनुमति हेतु न्यायालय में याचिका

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई जिसमें मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश और नमाज़ पढ़ने की अनुमति देने की मांग की गई है, बार एंड बेंच  ने रिपोर्ट किया।

यह याचिका न्यायालय में एक मुस्लिम जोड़े ने दायर की है जिसमें उन्होंने कहा है कि मस्जिद में महिलाओं को प्रवेश न करने देना गैरकानूनी है और साथ ही साथ असंवैधानिक भी क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 14,15,21 और 25 का इससे उल्लंघन होता है।

मुस्लिम जोड़े के आधार पर याचिका दायर करने वाले वकील आशुतोष दुबे ने बताया क़ुरान में लिंग के आधार पर मस्जिदों में प्रवेश करने जैसा कोई प्रावधान नहीं हैं। यह लिंग अलगाव सिर्फ इस्लामिक धर्मशास्त्र के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया उनका एक विचार है। इसकी के साथ यह भी कहा गया कि पैगंबर मोहम्मद ने भी महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश ना करवाए जाने पर कुछ कहा है। पुरुषों और महिलाओं का यह संवैधानिक अधिकार है कि वे अपनी आस्था के अनुसार किसी की भी पूजा कर सकता है।

याचिका में कहा गया कि जमात-ए-इस्लामी और मुजाहिदीन संप्रदाय के अंतर्गत महिलाओं को मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की अनुमति है पर सर्वाधिक सुन्नी संप्रदाय में महिलाओं का मस्जिदों में प्रवेश वर्जित है।

यह याचिका मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश और नमाज़ पढ़ने की अनुमति के लिए दायर की गई है। इसी के साथ इस याचिका में महिलाओं को मस्जिद में मुसल्ला के अंदर प्रवेश के लिए भी कहा गया है। सर्वोच्च न्यायालय से यह भी दरख्वास्त की गई है कि मस्जिदों में पुरुषों और महिलाओं को अलग करने के लिए लगाए गई आड़ को भी हटाया जाए और महिलाओं के लिए भी मस्जिद जाने के लिए वही रास्ता रखा जाए जो पुरुषों को लिए होता है।