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एमएसएमई हेतु 3 लाख करोड़ रुपये का ऋण, लघु-सूक्ष्म उद्योगों की परिभाषा परिवर्तित

आत्मनिर्भर भारत के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की विस्तृत जानकारी देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मध्यम, सूक्ष्म, लघु और कुटीर उद्योगों (एमएसएमई) के लिए 3 लाख करोड़ रुपये की ऋण योजना है। इसका लाभ 31 अक्टूबर 2020 तक उठाया जा सकता है जिसके लिए किसी गारंटी आवश्यकता नहीं होगी। इससे 45 लाख इकाइयों के लाभान्वित होने की अपेक्षा है।

20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान तनाव में चल रहीं इकाइयों के लिए है जिससे 2 लाख से अधिक इकाइयों को लाभ मिलेगा। एमएसएमई के विस्तार के लिए फंड ऑफ फंड्स का प्रावधान किया गया है जिसेक अधीन 50,000 करोड़ रुपये की इक्विटी होगी।

एमएसएमई की परिभाषा में भी संशोधन किया गया है। एमएसएमई के अधीन परिभाषित होने के लिए इकाई के निवेश स्तर को ऊपर उठाया गया है। विनिर्माण और सेवा इकाइयों को इस परिभाषा में अब समान स्तर पर रखा गया है। सूक्ष्म इकाई का उच्चतर निवेश 1 करोड़ रुपये होगा, लघु उद्योग में 10 करोड़ रुपये और मध्यम उद्योग में 20 करोड़ रुपये का उच्चतम निवेश तय किया गया है।