समाचार
श्रीलंका हमलों में प्रयुक्त विस्फोटक आईएस करता है उपयोग, विदेशी संबंध के संकेत

ईस्टर उत्सव के मौके पर श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में हमलावरों ने मदर ऑफ सैटन (शैतान की माँ) नाम के विस्फोटकों का इस्तेमाल किया था। इस हमले में 250 से ज़्यादा लोग मारे गए और 500 से अधिक घायल हुए थे।

एएफपी  की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के एक महीने बाद जाँच अधिकारियों ने इस बात का खुलासा किया है। उन्होंने कहा, “आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ग्रुप इन विस्फोटकों का इस्तेमाल करता है। इससे हमले में विदेशी हाथ होने के संकेत मिलते हैं।”

जाँच अधिकारियों के मुताबिक, “हमले में इस्तेमाल हुए विस्फोटकों को इस्लामिक स्टेट के विशेषज्ञों के अलावा स्थानीय जिहादियों ने बनाया था। उन्होंने विस्फोटक को ट्रायासिटोन ट्रायपेरोक्साइड (टीएटीपी) का नाम दिया था।”

एएफपी को जाँच में शामिल अधिकारी ने बताया, ‘टीएटीपी बनाने के लिए आतंकियों को रसायन और उर्वरक बाहर से आसानी से मिले। स्थानीय आतंकी संगठन नेशनल तौहीद जमात को बम बनाने में ज़रूर विदेशी मदद मिली होगी। यह ऐसे विस्फोटक नहीं हैं, जिसे यूट्यूब पर देखकर बनाया जा सके।”

इससे पहले मदर ऑफ सैटन का इस्तेमाल 2015 में पेरिस में हुए हमलों के दौरान हुआ था। 2017 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर अरीना में और 2018 में इंडोनेशिया में चर्चों पर हुए हमलों में भी इसका उपयोग किया गया था।