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मोदी सरकार ने बीपीसीएल, कॉनकोर और एससीआई के निजीकरण को दी स्वीकृति

अब तक के सबसे बड़े निजीकरण अभियान के तहत केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने बुधवार को ब्लू-चिप ऑयल फर्म भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), शिपिंग फर्म शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) और ऑनलैंड कार्गो मूवर कॉनकोर के निजीकरण को स्वीकृति दे दी है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जानकारी दी, “सीसीईए ने देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी स्वामित्व वाली बीपीसीएल में प्रबंधन नियंत्रण के पूर्ण हस्तांतरण के साथ सरकार की संपूर्ण 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दे दी। इसके बाद नुमालीगढ़ रिफाइनरी को अपनी जद से बाहर कर दिया है।”

उन्होंने कहा, “नुमालीगढ़ रिफाइनरी की हिस्सेदारी तेल एवं गैस क्षेत्र की किसी सरकारी कंपनी को ही बेची जाएगी और इस प्रकार यह कंपनी सार्वजनिक उपक्रम बनी रहेगी।” ऐसे में सऊदी अरामको, फ्रांसीसी मेजर टोटल, बीपी पीएलसी, एक्सॉनमोबिल, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) बीपीसीएल को प्राप्त करने के लिए सबसे आगे हैं।

कोनकोर में 54.80 प्रतिशत हिस्सेदारी में से 24 प्रतिशत हिस्सेदारी सरकार के पास रहेगी लेकिन 30.80 प्रतिशत हिस्सेदारी का रणनीतिक निवेशक किया जाएगा। सरकार टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (टीएचडीसी) और नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉर्प लिमिटेड (निप्पको) में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी। सूत्रों की मानें तो एनटीपीसी दोनों कंपनियों में केंद्र द्वारा पूरी हिस्सेदारी लेने के लिए करीब 10,000 करोड़ रुपये की पेशकश कर सकती है।

निप्पको में केंद्र की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में 1,500 मेगावाट बिजली संयंत्रों का संचालन करती है, जबकि टीएचडीसी में इसकी 75 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टीएचडीसी इंडिया में उत्तर प्रदेश सरकार की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत है।