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“मिशन शक्ति का महत्त्व पोखरण परीक्षण के समतुल्य”- पूर्व डीआरडीओ प्रमुख

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) पूर्व प्रमुख और नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने 27 मार्च को हुए एंटी सैटेलाइट मिसाइल (ए-सैट) मिशन को 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण के समतुल्य बताया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया  के साथ एक साक्षात्कार में वीके सारस्वत ने कहा, “यह 1998 के पोखरण परीक्षण के बराबर है क्योंकि राष्ट्र की इच्छाशक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने यह इच्छाशक्ति दिखाई थी इसलिए पोखरण परीक्षण सफल हुआ।”

बुधवार (27 मार्च) को भारत ने 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर निचली कक्षा वाले एक उपग्रह  को मारकर अपनी उपग्रह-रोधी क्षमता का परीक्षण किया। इस परीक्षण को ‘मिशन शक्त्ति’ का नाम दिया गया जिसे अब्दुल कलाम द्वीप से पूरा किया गया।

भारत द्वारा किए गए इस परीक्षण की वजह से भारत अब राष्ट्र के उन चंद देशों में शामिल हो गया है जो सैटेलाइट को ऑर्बिट में मार गिराने की क्षमता रखते हैं। इस परीक्षण के बाद रूस, चीन और अमेरिका के बाद भारत विश्व का चौथा ऐसा देश बन गया है जिसके पास यह क्षमता है।