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“वुहान लैब नागरिक अनुसंधान संग सैन्य गतिविधियों में भी शामिल थी”- माइक पोम्पियो

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया कि चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (डब्ल्यूआईवी) अपने नागरिक अनुसंधान के साथ सैन्य गतिविधियों में लगा हुआ था।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, माइक पोम्पियो ने कहा, “मैं निश्चित रूप से जो कह सकता हूँ, वह यह है कि हम जानते हैं कि वे उस प्रयोगशाला में पीपल्स लिब्रेशन आर्मी से जुड़े प्रयासों में लगे हुए थे। इस प्रकार वे दावा कर रहे थे कि सिर्फ एक अच्छा पुराना नागरिक शोध चल रहा है जबकि साथ-साथ सैन्य गतिविधि चल रही थी।”

उन्होंने कहा, “चीन हमें यह बताने से मना करता है कि यह क्या था। उन्होंने उनमें से किसी की प्रकृति का वर्णन करने से मना कर दिया। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन तक को अनुमति देने से मना कर दिया था, जब उसने वहाँ जाने की कोशिश की थी।”

वायरस की कृत्रिम उत्पत्ति पर पर्दा डालने के लिए इसमें चीनी वैज्ञानिकों ने कई बदलाव किए हैं। ब्रिटेन के प्रोफेसर एंगस डलग्लीश, नार्वे के वैज्ञानिक और उद्यमी डॉक्टर बर्जन सोरेन्सन ने अध्ययन के बाद दावा किया कि वुहान लैब के वायरस विशेषज्ञों ने इसे बनाने के बाद सुबूत हटाने के लिए रिवर्स इंजीनियरिंग से इसका नया स्वरूप पैदा किया, ताकि वायरस प्राकृतिक रूप से चमगादड़ से बना लगे।

ब्रिटिश दैनिक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपने यहाँ की गुफा में मिलने वाले चमगादड़ से मिले प्राकृतिक वायरस में स्पाइक जोड़े। इससे यह घातक और तेज़ी से प्रसारित होने वाले वायरस में परिवर्तित हो गया। इसके लिए वैज्ञानिकों ने अमेरिका में चलाए गए गेन ऑफ फंक्शन नाम प्रोजेक्ट का हवाला दिया।