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उच्चतम न्यायालय में मायावती का हलफनामा, वापस नहीं करेंगी मूर्तियों में लगी राशि

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने मंगलवार (2 अप्रैल) को उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दायर किया है, जिसमें मायावती ने सफाई देते हुए कहा है कि अपनी प्रतिमाएँ और हाथी की मूर्तियाँ जनता की इच्छा से बनाई थी। मायावती ने इस हलफनामे में सरकार को इन मूर्तियों पर हुए खर्च पैसे देने से भी इनकार किया है, लाइव हिंदुस्तान  ने रिपोर्ट किया।

मायावती ने बताया कि मूर्तियों के निर्माण के लिए निधि बजटीय आवंटन किया गया था और साथ ही राज्य विधानसभा की मंजूरी के लिए स्वीकृति दी गई थी। उन्होनें बताया कि मूर्तियों का निर्माण करना समाज सुधारकों के मूल्यों और आदर्शों का प्रचार करना था, ना कि पार्टी के चिह्न का प्रचार करना है।

फरवरी में उच्चतम न्यायालय ने मायावती से कहा था कि उन्हें लखनऊ और नोएडा में बनीं अपनी और बसपा के चुनाव चिह्न हाथी की मूर्तियों पर खर्च किया गया सरकारी धन वापस करना होगा। कोर्ट ने इस मामले में एक वकील द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की थी जिसमें कहा गया तह कि सार्वजनिक धन का उपयोग अपनी मूर्तियाँ और पार्टी के प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा था कि हमारे संभावित विचार में मायावती को अपनी और पार्टी चिह्न की मूर्तियों पर खर्च किया हुआ सरकार धन सरकारी खजाने में वापस डालना होगा।

वहीं इस पीठ ने यह भी कहा था कि यह अभी संभावित विचार है क्योंकि इस मामले की सुनवाई में वक्त लगेगा। पीठ ने बताया था कि इस मामले की अंतिम सुनवाई 2 अप्रैल को होगी।