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भारतीय बाज़ार में चीनी स्मार्टफोन्स की जून के तिमाही नतीजों में हिस्सेदारी 9% गिरी

चीनी स्मार्टफोन्स जो भारतीय बाज़ार पर अपना कब्ज़ा जमाए बैठे थे, उनकी भारत और चीन के बीच गहरा तनाव उत्पन्न होने के बाद बाज़ार की हिस्सेदारी में भारी गिरावट आई है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में बाज़ार अनुसंधान फर्म काउंटरपॉइंट के सर्वेक्षण के हवाले से बताया गया कि आम जनता के बीच बढ़ती चीनी विरोधी भावना का नुकसान चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं को उठाना पड़ रहा है। उनके द्वारा 30 जून को समाप्त होने वाले बाज़ार के तिमाही आँकड़ों में चीनी स्मार्टफोन की हिस्सेदारी का प्रतिशत 81 से गिरकर 72 प्रतिशत रह गया है।

यह आँकड़े कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन से पड़े व्यवधानों से मेल खाते हैं, जब स्मार्टफोन शिपमेंट में भी सालाना आधार पर 51 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 18 मिलियन यूनिट्स तक देखी गई थी।

कई चीनी स्मार्टफोन निर्माता जैसे शियोमी, ओप्पो, वीवो, वनप्लस और लेनोवो भारत को अपनी संभावनाओं के लिए एक प्रमुख और उभरते बाजार के रूप में देखते हैं। इनके बीच देश में प्रमुख गैर चीनी निर्माताओं के रूप में कोरियाई दिग्गज सैमसंग और यूएस का एप्पल इंक शामिल हैं।

यह गौर किया जाना चाहिए कि एप्पल इंक जिसकी आपूर्ति शृंखला चीन पर बहुत अधिक निर्भर है, वह गत कई वर्षों से भारत में अपने कई मॉडलों का उत्पादन शुरू कर रही है।