समाचार
केंद्रीय दल से पश्चिम बंगाल में असहयोग, स्वीकृति के बिना सदस्यों के आने-जाने पर पाबंदी

ममता बनर्जी सरकार ने पश्चिम बंगाल में कोरोनावायरस का निरीक्षण करने गई केंद्र सरकार की अंतर मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) को बाँधकर रखने की कोशिश की। टीम के मुखिया अपूर्व चंद्रा का राज्य के मुख्य सचिव को लिखा पत्र इसकी ओर संकेत कर रहा है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अपूर्वा चंद्रा ने पत्र में लिखा कि किसी भी राज्य में केंद्र की टीम जाती है, तो सुरक्षा का दायित्व स्थानीय पुलिस पर होता है। हवाई अड्डे से लेकर टीम को कहाँ-कहाँ जाना है, ये सब सूट प्लान पुलिस को पहले ही दे दिया था लेकिन ये सारे काम बीएसएफ को करने पड़े।

सहयोग के उलट डीसीपी ने बीएसएफ को आदेश दिए कि उनकी स्वीकृति के बिना केंद्रीय दल कहीं बाहर न जा पाए। अगर वे एयरपोर्ट जाते हैं तो उन्हें रोका जाए। टीम के सदस्यों पर सख्त पहरा बैठाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी गई।

दल को अस्पतालों के दौरे के दौरान भी संतोषजनक जवाब नहीं मिले। एमआर बांगुर अस्पताल में टेस्ट रिपोर्ट लेने के लिए पाँच दिन से लोग प्रतीक्षा कर रहे थे। सीएनसीआई में कई मरीज मिले, जिनका टेस्ट 17 और 18 अप्रैल को हुआ लेकिन रिपोर्ट 23 अप्रैल तक नहीं मिली। मृत्यु प्रमाण-पत्र के इंतज़ार में चार घंटे तक शवों को मरीजों के बीच रखा गया।

टीम के साथ वरिष्ठ की बजाए कनिष्ठ अधिकारियों को भेजा गया। उन्हें अधिक जानकारी भी नहीं थी। अस्पताल के दौरे के दौरान टीम के सदस्यों को पीपीई किट भी मुहैया नहीं करवाई गईं। राज्य के स्वास्थ्य महकमे ने लिखित में बताया कि रोज 1.25 लाख से 2 लाख लोगों की जाँच हो रही है। दौरे में बताया गया कि 400 से 900 लोगों के टेस्ट रोजाना हो रहे हैं। दोबारा टेस्ट के बारे में किसी को कुछ नहीं पता था।