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कांग्रेस और वामपंथ ने ममता बनर्जी के एकता के आह्वान को नहीं दी तवज्जो

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी का एक और वार उल्टा पड़ गया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने के लिए कांग्रेस व वामपंथ ने उनके आह्वान को महत्व नहीं दिया, द हिंदू  ने रिपोर्ट किया।

दीदी पर कटाक्ष करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंजिया के सदस्य मोहम्मद सलीम ने ट्वीट किया, “हम कांग्रेस के बारे में नहीं कह सकते लेकिन सीपीआई(एम) ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन को बचाने के लिए तत्पर नहीं है। बंगाल में भाजपा के विरुद्ध लड़ाई का आह्वान करने का नैतिक अधिकार उन्होंने खो दिया है। फैसिज़्म के विरुद्ध लड़ने के लिए तृणमूल पर भरोसा नहीं किया जा सकता।”

इसी प्रकार की बातें कांग्रेस और वामपंथी दलों के नेताओं से सुनने को मिली जब पश्चिम बंगाल विधान सभा में अब्दुल मन्नान और सुजान चक्रबर्ती ने राज्य में भाजपा के उत्थान का दोष मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मढ़ा।

इसी बीच राज्यसभा में कांग्रेस सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने पार्टी का मत स्पष्ट करते हुए कहा कि एकता पर चर्चा तब ही की जा सकती है जब तृणमूल द्वारा लिये गए कांग्रेस के 17 विधायक पार्टी में वापस जाएँ।

सीपीआई(एम) के सहयोगी दल ऑल इंडिया फॉरवार्ड ब्लॉक ने कहा कि ममता बनर्जी को इस बात का एहसास होना चाहिए कि कैसे उन्होंने वामपंथी नेताओं पर गलत आरोप लगाकर, पार्टी कार्यालयों पर कब्ज़ा करके और विधायकों को खुद में मिलाकर उनका तंत्र बर्बाद किया है।

बुधवार को बनर्जी ने विधानसभा में वामपंथ और कांग्रेस को तृणमूल के साथ एक होने का आह्वान किया था। “हमारे लिए साथ काम करना ज़रूरी है। यह सबके हित में है।”, मुख्यमंत्री ने कहा।

इसी बीच भाजपा का मानना है कि अन्य पार्टियों के गठबंधन से उसे लाभ होगा। “यदि किसी सीपीआई(एम) या कांग्रेस समर्थक से कहा जाए कि तृणमूल में मिल जाओ, जो उनपर हमले करती आई है तो वह पार्टी नेतृत्व से पल्ला झाड़कर हमसे मिलना पसंद करेगा।”, मुकुल रॉय ने कहा।